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Horoscope, Janam Kundali, Business Problems, Health problems

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सूर्य पर हो रहे विस्फोट

सूर्य पर हो रहे विस्फोट के कारण सूर्य से सौर वायु का चुंबकीय तूफान पृथ्वी को अत्यंत प्रभावित करेगा। यह असर सूर्य पर आई अस्थाई तब-दिल्ली के कारण होता है। रूसी वैज्ञानिक चावोसकी  के अनुसार सूर्य पर होने वाले विस्फोट क्रांतियों और बीमारियों के कारण बनते हैं। इस विस्फोट के कारण पैदा हुआ सोलर सटाम इस पृथ्वी पर सभी जीवो को और वनस्पतियों को प्रभावित करेगा। धर्म एस्ट्रो रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोलॉजी सभी राशियों के लोगों पर होने वाले प्रभावों का विवरण दे रहा है।

 

मेष राशि

सूर्य के ऊपर हो रहे हैं विस्फोट का सबसे ज्यादा असर मेष राशि पर होगा। सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र और शुक्ल योग होने के कारण सूर्य मेष राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। मेष राशि वालों के  सूर्य पर होने वाले विस्फोटो के कारण घर पर, नौकरी में और व्यापार में अशांति का माहौल बनेगा। कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। तबादला होगा जो अनुकूला ना होगा। सेहत के तलक में सूर्य पर इस विस्फोट के कारण हुए परिवर्तन  से कोई नेक कसर नहीं होगा। छोटी छोटी तकलीफ तो रहेगी। 14 मई संक्रांति के बाद निश्चित तौर पर सुधार होना शुरू होगा। परंतु सूर्य पर होने वाला विस्फोट का असर एक साल तक रहेगा। जिससे मेष राशि वालों के क्रांतिकारी परिवर्तन होंगे । विदेश यात्रा के कार्यक्रम में कुछ रुकावट रहेगी यात्रा भी कम आनंदमई रहेगी। खर्चा भी रहेगा। जो मन को प्रसन्ना ना करेगा। परिवार में और नौकरी में विरोध बढ़ेगा। बेहतर होगा कि 15 जून 2018 तक घर में कोई भी सेनेटरी और फर्श का का काम ना कराया जाए। उपाय के के लिए ढाई किलो जौ एक किलो दूध में भिगोकर दोनों को इकट्ठा बहते पानी में डाला जाए। रोजाना  40 दिन तक नहाने के समय थोड़ा दूध पानी में डाला जाए फिर उसी से नहाया जाए। इस उपाय करने से सूर्य के ऊपर होने वाले विस्फोटों का असर मेष राशि वालों पर निश्चित तौर पर खत्म हो जाएगा।

 

वृषभ राशि

सूर्य के ऊपर हो रहे हैं विस्फोट का असर वृषभ राशि पर राशि पर कम रहेगा। सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य वृषभ राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। पारिवारिक स्थिति तनावपूर्ण रहेगी। उन्नति को लेकर जो योजनाएं बना रहे है उसमें विघ्न आएगा। और वह देरी से कामयाब होगी। बीमारी से सेहत में होता हुआ सुधार अचानक रुक जाएगा। बीमारी थोड़ी और लंबी चलेगी। 15 जून 2018 को सूर्या का वृषभ राशि और और आदाॅ नक्षत्र में प्रवेश शुभ रहेगा। 15 जून 2018 तक  काले और नीले रंग के वस्त्र ना खरीद करें। कोर्ट कचहरी के मामले बढ़ेंगे । मित्र भी शत्रुता वाला भाव रखेंगे। संघर्ष बढ़ेगा। इसका उपाय 5 हफ्ते मे हर शनीवार एक लीटर सरसों का तेल किसी भी धार्मिक स्थान पर दान करना सूर्या विस्फोट से निश्चित तौर पर आपकी रक्षा करेगा। और सूर्य सटाम के प्रभाव से होने वाले बुरे प्रभावों को खत्म करेगा

 

मिथुन राशि

 

सूर्य के ऊपर हो रहे हैं विस्फोट का सबसे ज्यादा असर मिथुन राशि पर होगा  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य मिथुन राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य के ऊपर हो रहे विस्फोट से मिथुन राशि वालों की सेहत नरम रहेगी डॉक्टरों के पास बार-बार जाना होगा परिवार में किसी सदस्य की सेहत ज्यादा खराब भी हो सकती है जीवनसाथी से आज बंद रहेगी परंतु उत्तम बुद्धि और अच्छी सोच होने के कारण आप इन कष्टों से निश्चित तौर पर बाहर निकलेंगे आप की लोकप्रियता में कमी आएगी जिसके लिए अपने ही जिम्मेदार होंगे मित्र विश्वासघात कर सकते हैं सावधान रहें 15 जून 2018 को सूर्य का मिथुन राशि में  और आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश आपको निश्चित तौर पर इस सूर्य पर होने वाले विस्फोटों के कारण बुरे प्रभावों से राहत दिलाएगा उपाय के तौर पर 1 किलो गुड पांच मंगलवार किसी भी धार्मिक स्थान प्रदान करना शीतलता और शुभ अवसर प्रदान करेगा

 

कर्क राशि

सूर्य पर  हो रहे हैं विस्फोट का सबसे ज्यादा असर कर्क राशि पर होगा। सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य कर्क राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। परिवारिक स्थिति और बंटवारे को लेकर घर में तनाव रहेगा। सूर्य पर पर होने वाले विस्फोट से कर्क राशि वालों की सेहत पर  बुरा प्रभाव रहेगा। सिर दर्द छोटी-छोटी तकलीफ आम रहेगी। भाग्य का हो रहा अच्छा असर भी कम हो जाएगा। कई महत्वपूर्ण निर्णय गलत साबित होंगे। कर्क राशि वाले 15 जून 2018 तक नए जूते नई चमड़े की बेल्ट ना खरीद करें सूर्या के इस बुरे प्रभाव से बचने के लिए सप्ताह में एक बार और 5 सप्ताह काले तिल 1 किलो बहते पानी में डाले निश्चित तौर पर  सूर्य का कर्क राशि के ऊपर हो रहा बुरा प्रभाव कम हो जाएगा। और कष्टों से छुटकारा रहेगा।

 

सिंह राशि

सूर्य पर हो रहे विस्फोटो का सबसे ज्यादा असर सिंह राशि पर होगा।  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य सिंह राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य के ऊपर विस्फोटो का असर सिंह राशि वालों पर सेहत पर ज्यादा रहेगा। पांव में टांगों में कष्ट रहेगा। पेट मे खराबी रहेगी। दांतों का कष्ट रहेगा। 17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। सिंह राशि वालों को घर में चेहरा देखने वाला शीशा जो टूटा हुआ और ज्यादा खराब है। उसे घर से दूर कर दे। ग्रहों का दुष्प्रभाव इससे कम होगा। नहाने के समय पानी में थोड़ा दूध डालकर दूध वाले पानी से नहाना शरीरी कष्टों से बचाव करेगा। और सूर्य का होने वाला दुष्प्रभाव कम होगा। सावत बदाम लकड़ी के छिलके़ वाले 250 ग्राम हर हफ्ते किसी भी धार्मिक स्थान पर दान करना निश्चित तौर पर सेहत धन-धान्य और मान-सम्मान में बढ़ाने वाला होगा।

 

कन्या राशि

सूर्य पर हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर कन्या राशि पर होगा। सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य  कन्या राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। कन्या राशि वालों पर सूर्य के ऊपर होने वाले इन विस्फोटों का असर विद्या पर पड़ेगा। विद्या में रुकावटें आएंगी। नई जगह विद्या में जाना कुछ ज्यादा सफल ना होगा। दो मन रहेंगे वहां पर स्थिर रहना ही उत्तम रहेगा। सेहत के तलक में कन्या राशि वालों का सूर्य का प्रभाव शरीर के निचले हिस्से पर रहेगा सूर्यास्त से ही शरीर की ऊर्जा कम होती रहेगी। जो सूर्य उदय तक रहेगी। सूर्य उदय के बाद फिर खुशी वाला समय और अच्छी सेहत वाला समय बहाल होगा। परिवारिक विवाद होगा। व्यापार में और नौकरी में समय को ज्यादा अनुकूल नहीं रहेगा।17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से निश्चित तौर पर राहत दिलवाएगा। कन्या राशि वालों के रसोई खाना में बिजली के उपकरण खराब और पानी के  उपकरण खराब रहेंगे। उनको ठीक कराना नेक असर पैदा करेगा। सूर्य का दुष्प्रभाव दूर करने के लिए एक किलो महा साबत हफ्ते में एक बार और पाँच हफ्ते किसी धार्मिक स्थान पर दान करना नेक असर प्रदान करेगा।

 

तुला राशि

सूर्य के ऊपर हो रहे हैं विस्फोट का सबसे ज्यादा असर तुला राशि पर होगा सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य  तुला राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य के ऊपर हुए विस्फोटों का असर तुला राशि के परिवारिक स्थिति व्यापारिक स्थिति और नौकरी स्थिति पर पड़ेगा जो भावी योजनाएं उन्नति के लिए बन रही थी उन में रूकावट आएगी नए सिरे से योजनाएं बनेंगी जो कामयाब होगी उसके लिए समय लगेगा सेहत अच्छी रहेगी जीवनसाथी की सेहत कुछ नरम रहेगी हल्का बुखार सिर दर्द छोटी-छोटी तकलीफें रहेंगी17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से निश्चित तौर पर राहत दिलवाएगा घर में पेंट का काम और ड्राइंग रूम में नया सजावट का सामान 20 जून 2018 के बाद ही खरीद करें शत्रु पक्ष पर बुरा असर रहेगा शत्रु पक्ष भयभीत होगा और आप की विजय निश्चित होगी एक और पर हफ्ते में 1 बार 5 हफ्ते 1 किलो काले तिल हर रविवार बहते पानी में डालना कीकासर पैदा करेगा और सूर्य के हो रहे  बुरे प्रभाव को कम करेगा नहाते समय पानी में थोड़ा दूध डालकर रहा ना निश्चित तौर पर स्वास्थ्य और धन लाभ पैदा करेगा

वृश्चिक राशि

सूर्य पर हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर तुला राशि पर होगा।  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य तुला राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य के ऊपर हो रहे विस्फोटों के कारण वृश्चिक राशि वालों के परिवार में और मित्रों में विवाद होगा। जो ज्यादा सुखद नहीं होगा। धर्म के उल्ट सोच बनेगी जो भाग्य को ज्यादा उन्नत नही करेगी। किसी परिवारिक सदस्यों की सेहत ज़्यादा खराब होगी। जो मन को दुख देने वाली होगी। देव कृपा से अपना मुख्यत स्वास्थ्य ठीक रहेगा। केवल कंधों में कुछ खिंचाव रहेगा। जो कुछ दिनों में ही ठीक हो जाएगा। वृश्चिक राशि वाले 15 जून तक बिजली से गर्म होने वाले उपकरण ना खरीद करें। भाग्य के लिए उनका असर उनदा होगा।17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। सूर्या सटोम के इस बुरे असर से बचाव के लिए सफेद चावल ढाई किलो हफ्ते में एक बार पाँच हफ्ते बहते पानी में डालना नेक असर पैदा करेगा। और सब कष्टों से छुटकारा दिलाएगा।

 

धनु राशि

सूर्य पर  हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर धनु राशि पर होगा।  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य  तुला राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य के ऊपर हो रहे विस्फोट के कारण धनु राशि वालों की सेहत कुछ नरम रहेगी। शरीर के ऊपरी भाग पर ज्यादा असर रहेगा। नजर कमजोर होगी। शरीर में थकान रहेगी। व्यर्थ खर्चा और धन हानि हो सकती है। सावधान रहें ! समाज मे मान सम्मान बढ़ेगा और समाज में उचित स्थान प्राप्त होगा। व्यापार और नौकरी में  उन्नति होगी। 17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। धनु राशि वाले यदि संभव हो तो 15 जून तक लंबी यात्रा ना करें। सूर्य पर विस्फोट से पैदा हुए दुष्प्रभाव को कम करने के लिए काले तिल एक किलो हफ्ते में एक बार पाँचे इतवार किसी भी धार्मिक स्थान पर दान देना। सब कष्टों से राहत दिलाएगा। नया वाहन खरीद करने के योग है।वाहन  काला नीला रंग का खरीद ना करें।

 

मकर राशि

सूर्य पर हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर तुला राशि पर होगा। सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य  तुला राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य पर हो रहे विस्फोट के कारण मन की अवस्था ज्यादा उचित नहीं रहेगी। मन में भय रहेगा। तरह-तरह के नकारात्मक ख्यालात आएंगे। पर सेहत के तलक में मकर राशि वाले भाग्यवान रहेंगे। नया घर नया व्यापारिक संस्थान और तरक्की के योग हैं।जो कुछ रुकावटें के बाद पूर्ण होगा।15 मई से 15 अगस्त तक यात्रा में विघ्न रहेगा। यात्रा को बीच में छोड़कर ही वापस आना पड़ेगा।17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। मकर राशि वाले इस माह में हाथी वाले और गणेश जी वाले मूर्तियां लकड़ी की पत्थर की और मिट्टी की खरीदना ना करना भाग्य उदय में सहायक रहेगा। अपने स्वास्थ्य और परिवार आपके लिए काले तिल एक किलो पांच  रविवार किसी भी धार्मिक स्थान पर दान करना सूर्य पर होने वाले विस्फोटों के दुष्प्रभाव से बचाएगा।

 

कुंभ राशि

सूर्य पर हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर कुंभ राशि पर होगा।  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य कुंभ राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। सूर्य पर हो रहे विस्फोटों के कारण अगले कुछ महीनों में खर्चा कुछ ज्यादा रहेगा।  खर्चा मन को प्रसन्नता ना देगा। विदेश यात्रा में विघ्न पड़ेगा। परंतु कुछ समय उपरांत विदेश यात्रा हो जाएगी। विपरीत के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। जो खर्चा और निंदा कराने वाला होगा। प्रबल भाग्य होने के कारण सूर्य स्ट्रांम का कुंभ राशि के ऊपर ज्यादा दुष्प्रभाव नहीं होगा। वाहन और परिवार का सुख बना रहेगा। धन-धान्य अच्छा रहेगा। छत पर पड़ी पानी की टंकी को रिपेयर करवाना और घर के अंदर दाखिल होते समय दाहिने हाथ में नल को ठीक और चालू हालत मे रखना असर पैदा करेगा। 17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। बुरे असर से बचाव के लिये के लिए एक किलो गुड़ पांच मंगलवार किसी धार्मिक स्थान पर दान करना मैं असर पैदा करेगा।

 

मीन राशी

सूर्य पर हो रहे विस्फोट का सबसे ज्यादा असर मीन राशि पर होगा।  सूर्य का मेष राशि श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग होने के कारण सूर्य मीन राशि को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है।  सूर्य पर होने वाले विस्फोट का बुरा असर आमदनी पर पड़ेगा। पैसे की आमद मीन राशि वालों के लिए रुकेगी। ऋण मुक्ति के लिए रुकावटें और बिघन  पैदा होंगे। व्यापार और नौकरी में परेशानी रहेगी। जीवन साथी के परिवार के साथ संबंधों में रूकावट आएगी। परेशानी रहेगी।17 अगस्त को चंद्रमा का स्वाति नक्षत्र तुला राशि में प्रवेश सब कष्टों से राहत दिलवाएगा। दोबारा से सब संबंध नेक हो जाएंगे। सेहत के तलक मे मीन राशि वाले धनी  रहेगे। सेहत बढ़िया रहेगी और स्वस्थ रहेंगे। सूर्य के बुरे असर से बचाव के लिए मीन राशि वाले को ढाई किलो दूध किसी धार्मिक स्थान पर दान देंना उत्तम फल पैदा करने वाला होगा। धन-धान्य पूरन रहेगा ।

हमें किस तरफ सिर रखकर सोना चाहिए।

वास्तु शास्त्र भी ज्योतिष शास्त्र का ही एक अंग है ।ज्योतिषशास्त्र के पूर्ण ज्ञान के बिना वास्तु निर्धारण की प्रतिक्रिया पूरण ही नहीं हो सकती है। सिर्फ दिशा और उसके फायदे नुकसान बता कर  वास्तु पूरा नहीं हो सकता है । वास्तु शास्त्र की पूर्णता ज्ञान के लिए कुंडली का, ग्रहों का, और नक्षत्रों का, ज्ञान होना आवश्यक है।आज हम बात करेंगे हमें किस तरफ सिर रखकर सोना चाहिए। ता जो चुंबकीय तरंगें हमारे शरीर को संतुलित रख सके ।और हमारी निंद्रा में कोई विघ्न ना आए। चार दिशाएं  उत्तर, पूर्व ,दक्षिण और पश्चिम है । हमारे चारों तरफ विद्युतीय तरंगों का घेरा बना हुआ है । जो हमें लगातार प्रभावित कर रहा है ।उत्तर की तरफ से चुंबकीय तरंगें आ रही है और दक्षिण की तरह जा रही है ।सोने के लिए दिशा का चयन आयुर्वेद के ग्रंथ रणवीर ग्रंथ के अनुसार वात, पित्त ,और कफ मे  से अपनी अनुरूपता जानकर उस दिशा में सोने से निश्चित तौर पर सेहत में सुधार होता है । क्योंकि दिन का लगभग आधा समय हम अपने शयनकक्ष में गुजारते हैं ।अगर हम उत्तर दिशा को एक ठोस चुंबक मान ले हमारा सिर भी एक चुंबक की तरह ही काम करता है । दो चुंबंको को आपस में चिपकाना हो तो हमेशा एक रिनात्मक दूसरी घनात्मक तरंगों वाली ही आपस में जुड़ेंगी। इसलिए उत्तर की तरफ हमें सिर नहीं करके सोना चाहिए ।बात करेंगे कौन सी दिशा हमारे सोने के लिए बेहतर है। अगर हमारा सोने वाला कमरा उत्तर पूर्व में हो हमें पूरब दिशा की तरफ सिर करके सोना चाहिए पूर्व दिशा की तरफ सिर करके निंद्रा अच्छी आएगी ।मस्तिष्क को आराम मिलेगा। और सुबह जल्दी उठने में मदद मिलेगी । अच्छी और  शांत निंद्रा के लिए पीली सरसों के दाने पीले कपड़े में बांध का सिरहाने के नीचे रखने से नेक फल होगा मस्तिष्क की कार्य कुशलता बढ़ जाएगी। पढ़ने वाले बच्चे और ध्यान करने वाले लोग जो लोग सुबह जल्दी उठना चाहते हैं। उन्हें पूरब की तरफ सिर करके सोना चाहिए ।अगर हमारा सोने का कमरा पूर्व दक्षिण की तरफ है। तो हमें दक्षिण की तरफ सिर करके सोना चाहिए। दक्षिण की तरफ सिर करके सोने से निंद्रा आरामदायक और देर तक सोने में मदद करती है। लंबे समय दक्षिण की तरफ सिर करके सोने के बाद शरीर में कफ और नजला जुकाम के रोग तो ठीक हो जाएंगे ।पर दक्षिण की तरफ से आने वाली अल्ट्रावायलेट तरंगों का असर हमारे आंखों पर और शरीर पर जरूर पड़ेगा जिसके कारण हमारे स्वभाव में चिड़चिड़ापन और पेट संबंधी रोग शुरू हो जाते है । और  दक्षिण की दिशा में आरामदायक मुंद्रा के लिए सिरहाने के नीचे चांदी के सिक्के रखना मददगार होगा जो हमें बस दक्षिण दिशा के दुष्प्रभावों से बचाएंगा।अगर हमारा सोने वाला स्थान दक्षिण पश्चिम में है तो पश्चिम में सिर कर कर सोना सबसे उत्तम है 25 साल से 55 साल तक के लोग पश्चिम दिशा की तरफ सिर्फ घर पर निर्विघ्न सो सकते हैं ।अच्छी निंद्रा के लिए गुड लाल कपड़े में बांधकर बिस्तर पर के नीचे रखना उत्तम असर पैदा करेगा दांपत्य जीवन के लिए अनुकूलता पैदा करेगा। पश्चिम दिशा में सोना घर की औरतों और धन दौलत के लिए शुभ होगा।

ज्योतिष एक रहस्यमई  पर सरल विज्ञान है। धर्म एस्ट्रो ज्योतिष के गहरे  रहस्यमई विज्ञान को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। अगर सरल शब्दों में ज्योतिष विद्या के अर्थ को समझना है ।

तो कल्पना करें कि जैसे एक बड़ी मीनार के गुमबंद पर बैठकर मनुष्य दूर तक देख सकता है। पर नीचे खड़ा  मनुष्य इतनी दूरी तक नहीं देख पाता । ऊपर गुंबद पर बैठे मनुष्य के लिए वह वर्तमान है । नीचे खड़े मनुष्य के लिए वह भविष्य है । हम ज्योतिष विज्ञान के कंधों पर बैठकर भविष्य की घटनाओं को आसानी से देख सकते हैं । ज्योतिष भी इसी तरह काम करता है। ज्योतिष विज्ञान की मदद से इंसान आने वाली अनुकूल एवं प्रतिकूल अवस्थाओं को पहले से ही जान सकता है।

हम बात कर रहे हैं ज्योतिष विज्ञान की। सितारों की। नक्षत्रों की। आकाशगंगा की तथा सितारों के परिवार की। यह चमकते सितारे एवं घूमते हुए ग्रह समस्त पृथ्वी पर कैसे असर करते हैं। इसी का विश्लेषण ज्योतिष विद्या में किया गया है ज्योतिष का विषय कोई नया विषय नहीं है बल्कि 90,000 साल पुराने वेदों में भी इसका उल्लेख है। आकाशगंगा के  ग्रहों में से केवल सात ग्रहों का ही ज्योतिष में उल्लेख है ।सूर्य। चंद्रमा । मंगल । बुद्ध । बृहस्पति । शुक्र ।और शनि यह सात ग्रह पृथ्वी के करीब होने के कारण इनकी विद्युतीकृत तिरंगे सूर्य की किरणों के रथ पर सवार होकर हमारी इस पृथ्वी पर पहुंचती है ।और ।इस पृथ्वी के समस्त मनुष्य जाती । वनस्पति और पानी पर अपना सब से गहरा प्रभाव डालती हैं।

हम सब जानते हैं की इस पृथ्वी पर सब प्रजातियों का उत्थान चंद्रमा की बढ़ती हुई । और घटती हुई कलाओं के 28 दिन के चक्कर पर निर्भर है ।बच्चे के जन्म के समय जो ग्रह और नक्षत्र जिस राशि में उस समय होते हैं ।उसी के हिसाब से जन्म कुंडली बनाई जाती है। दरअसल जन्म कुंडली एक फोटो के नेगेटिव की तरह है ।जैसे नेगेटिव रोशनी के संपर्क में आने से पल भर में  जो उसके ऊपर छप जाता है। फिर वह सारी उम्र कायम रहता है। जन्मकुंडली में जन्म समय में स्थित ग्रह भी तमाम उम्र फलादेश करने की विधि मे सहायक होते हैं । ज्योतिष के हम दो हिस्से मानते है। एक हिस्सा गणित और दूसरा हिस्सा फलादेश का माना जाता है ।ज्योतिष फलादेश गणित के ऊपर ही निर्भर करता है ।और यह गणित हमें बताता है ।जनम के समय सितारों की आसमान में स्थिति और वर्तमान समय में ग्रह नक्षत्रों की व्यवस्था कैसी है। उसी के हिसाब से हम फलादेश और उपाय नियत करते है ।

ज्योतिष मे फलादेश को भी दो भागों में बांटा जाता है। फलादेश में कुछ बातें निश्चित और कुछ बातें अनिश्चित होती हैं। जैसे मनुष्य का रंग। ऊंचाई। स्वभाव । जैसे आम के पेड़ को आम ही लगेंगे जामुन नहीं लगेंगे। और जो भी वंशानुगत चीजें हैं ।इन्हें  बदला नहीं जा सकता है । वह निश्चित मानी जाती है । सेहत ।धन। दौलत मान सम्मान ।यह दुनियाबी चीजें हैं ।वह अनिश्चित मानी जाती है ।इन्हें हम मेहनत से ।योग से। उपाय से। और देव कृपा से किसी हद तक बदल सकते हैं ।तभी तो भागवत गीता मे भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने और उसके फल को बहुत महत्व दिया गया है।भारतीय पुरातन काल में ऋषि मुनियों ने। सितारों की गणना से जीवन पर होने वाले प्रभावों को । पता लगाने के लिए बहुत शोध कार्य किया है ।तथा इसी खोज की परंपरा को सुमेरियन जाती ने आगे बढ़ाया ।

अब इस सदी में भी श्री के एस कृष्णमूर्ति। पंडित श्री सीताराम झा ।मैथिलीलेन। पंडित देवी दयाल जी का अभूतपूर्व योगदान रहा है ।इसलिए ऐसा नहीं है कि यह विद्या लुप्त हो गई है। समय-समय पर विद्वानों ने इस पर इस पर बहुत शोध कार्य किया है। इसी शोध को आगे बढ़ाते हुए “धर्मएस्ट्रो रिसर्च इंस्टिट्यूशन ऑफ एस्ट्रोलॉजी” कोशिश कर रहा है कि यह विद्या आप तक सरल तरीके से पहुंचाई जा सके।मानव शरीर पांच तत्वो ।अग्नि। जल ।वायु ।आकाश ।पृथ्वी से बना है। और समस्त ब्रह्मांड भी इन्हीं पाचं तत्वों मे से ही सृसजित है। यही पांच तत्व हमारे और ग्रहों के बीच एक समानता पैदा करते है। इसी के आधार पर ग्रह हमारे और इस समस्त पृथ्वी पर अपना प्रभाव डालते हैं। नक्षत्र और ग्रहों केे आधार पर  शुभाशुभ फल तय किये जाते हैं। एक ओर जहां कुछ नक्षत्र अति शुभ माने जाते हैं तो दूसरी ओर कुछ नक्षत्र ऐसे माने जाते हैं। जिनके रहते काल तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

वैदिक ज्योतिष मे नक्षत्रों की संख्या 27 । गृहो की संख्या 9 ।और राशियां की संख्या 12 मानी जाती है। विराट ज्योतिष हमें बताता है । कि कैसे जन्मतिथि । जन्म समय और जन्म स्थान की गणना से होने वाले । समस्त जीवन में प्रभावों की गणना की जाती है। जैसे हम बारिश से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करते हैं । इसी तरह ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के अनिष्ट प्रभाव से बचने के लिए हम उपाय का प्रयोग करते हैं। हम उपायों में तंत्र ।मंत्र। हवन और दान को मुख्य मानकर कार्य करते हैं । तथा कुछ सरल उपायों की मदद से ही जीवन में आई हुई अड़चनों को दूर किया जाता है।

 सूर्योदय के बाद दिन की शुरुआत

जीवन के इस भाग दौड़ में हर कोई सफलता चाहता है। छोटी-छोटी गलतियां अनजाने में करके हम सफलता को अपने से दूर कर देते हैं।

यह सामुद्रिक शास्त्र हमें बताता है। की किन छोटे-छोटे उपायों से हम अपना जीवन सरल और सफलतापूर्वक जी सकते हैं। हर कोई सुबह सूर्योदय के बाद दिन की शुरुआत अपने कामों से करता है।

किसी को कोई ऑफिस का काम है, किसी को व्यापार में काम, किसी को कोर्ट में काम है, तो किसी को किसी अधिकारी के पास काम है। लेकिन बहुत बार हम असफल होकर शाम को वापस आ जाते हैं। इस छोटे  उपाय से आपका जीवन सफल होने लगेगा। और आप खुश रहने लगेंगे।

नव ग्रहों में से मंगल मीठे का कारक और चंद्रमा पानी का कारक है। संसार में जितने भी कार्य सिद्धि संबंध है। यह मंगल ग्रह के द्वारा ही या उसके प्रभाव से ही सिद्ध होते हैं। आपने भी बहुत-बार सुना होगा कि यह कार्य बड़ा मांगलिक है ,यानी शुभ है ।

मंगल सब संसारिक चीजों में आपस में जोड़ने और संबंध कायम रखने में कार्य करता है। चंद्रमा सामुद्रिक में गति का मालिक है ।सफलता और शांति का सूचक है । अगर हम सुबह अपने कार्य पर जाने से पहले थोड़े मीठे (गुड या चीनी ) के साथ सिर्फ दो  घूंट पानी के उत्तर की तरफ मुंह कर के पीकर सीधे घर से बाहर निकले यानी इस करामाती टोटके के बाद वापसी घर की तरफ या अंदर की तरफ नहीं करनी है।

अगर किसी वजह से दोबारा अन्दर की तरफ आना हो जाए तो घर से बाहर निकलते समय फिर यही टोटका दोहराना होगा। यह टोटका हम किसी जरूरी काम पर जाने से पहले भी कर सकते हैं । देव कृपा से वह कार्य अवश्य सिद्ध होगा ।

इस करामाती टोटके से आपका मन सारा दिन शांत रहेगा। और आप खुशी महसूस करेगे। कुछ दिन लगातार करने के बाद मंगल और चंद् इस भौतिक शरीर में अपना स्थान दोबारा से पा लेंगे ।धनवृद्धि और सफलता  कुछ ही दिनों में कदम आपके चूमेगी और यह टोटका सिद्ध किया हुआ है धन्यवाद । 

 

ज्योतिष विज्ञान से पाएं अपने रोगों पर काबू

 

मनुष्य का शरीर अग्नि, जल, वायु ,आकाश, पृथ्वी, इन्हीं पांच तत्वों से बना है। इन पांचों तत्वों का शरीर में संतुलन होना बहुत जरूरी है ।शरीर में बीमारियों का आगमन इन पांचों तत्वों का संतुलन का ना होना है।

इस सदी में हमारे साइंटिस्टों ने इस बात को मान लिया है । पांच तत्व से मिलकर बायो ईलेकिट्रक में गनेटिक एनर्जी की उत्पत्ति होती है , जिससे मनुष्य को उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

सबसे महत्वपूर्ण शरीर मे पृथ्वी तत्व है, पृथ्वी सूर्य से तीसरा ग्रह है। करोड़ों साल पहले पृथ्वी भी सूरज का ही हिस्सा थी , टूट कर यह हिस्सा दूर जाने से ठंडा होना शुरू हो गया । ठंडा होने के बाद इसमें गुरुत्वाकर्षण पैदा हो गया, यह गुरुत्वाकर्षण हमारे मैग्नेटिक फील्ड पर बहुत असर करता है।

यानी हमारा शरीर जिस मिट्टी से बना है उसी मिट्टी से यह पृथ्वी भी बनी है ।उसके बाद हमारे शरीर में सबसे अधिक मात्रा में जल है। पूरे शरीर में 75% जल है, वैज्ञानिक के मत अनुसार इतना ही जल पूरी दुनिया में है यानि पृथ्वी का 75% जल है ।
शरीर में सारा संचार वायु द्वारा ही होता है ।अगर शरीर में वायु चल रही है सांस चल रही है तो ही सारी इंद्रियां काम करती है । यह एक प्रकार का संतुलन है। मनुष्य ऑक्सीजन लेता है, और पेड़ ऑक्सीजन छोड़ते हैं किसी भी मशीन को चलाने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है । इसी तरह इस शरीर रूपी इस यंत्र को चलाने के लिए भी ऊर्जा की जरूरत है ।यह उर्जा अग्नि का ही रूप है ।

इस तरह मनुष्य का शरीर उन तत्वों से बना है जिन तत्वों से यह पृथ्वी बनी है ।हमारा शरीर भी एक सूक्ष्म पृथ्वी की तरह ही काम करता है। जो भी वस्तु इस पृथ्वी पर है उसके आसपास एक मैग्नेटिक फील्ड है जो उसके लिए कार्य करता है

आधुनिकता के दौर में हमने उस मैग्नेटिक फील्ड को खराब कर दिया है। जिसकी वजह से यह सूक्ष्म पृथ्वी यानी हमारा शरीर रोगों से गिर गया है ।अगर हम अपने शरीर के पांचो तत्व परिपूर्ण कर लेते हैं ।और अपना मैग्नेटिक फील्ड ठीक कर लेते हैं, तो हम निस्संदेह स्वस्थ रहेंगे ।इसमें ज्योतिष का बहुत महत्त्व है

9 ग्रह 12 राशियां और 27 नक्षत्र मिलकर हमारे शरीर के पांचो तत्वों का संतुलन करते हैं ।हम ज्योतिष द्वारा जान सकते हैं, कि हमारा कौन सा तत्व कब खराब होगा ।हम उस तत्व को मामूली से उपाय से ठीक कर सकते हैं।

नजर प्रेत बाधा और दुर्भाग्य को दूर करें

जन्म हुआ तो हवन हुआ, पहली बार केश कटे तो हवन हुआ, नामकरण हुआ तो हवन हुआ, जन्मदिन आया तो हवन हुआ, ग्रह प्रवेश हुआ तो हवन हुआ, व्यवसाय शुरू किया तो हवन हुआ, शादी हुई तो हवन हुआ, बच्चे हुए तो हवन हुआ, संकट आया तो हवन हुआ, खुशियां आई तो हवन हुआ।

एक तरह से देखा जाए तो सारा जीवन  इसी हवन और धुनी से जुड़ा हुआ है। क्योंकि हमारी आस्था है कि हवन कर लेंगे तो भगवान का साथ हमारे साथ रहेगा। मैं कहीं भी रहूंगा भगवान साथ रहेंगे। कितनी भी कठिन परिस्थितियां हो भगवान मुझे हारने नहीं देंगे ।

धुनी में डाली गई आहुति हमारे जीवन रूपी अग्नि को विस्तार देगी। उसे ऊंचा उठाएंगी और जीवन की अग्नि में हमारे सारे पाप जलकर स्वाहा हो जाएंगे।

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धुनी प्रभाव से हमारे सत्कर्मों की सुगंधि सब दिशाओं में फैलेगी। धुनी हमारी हार और विफलताओं के सारे बीज जलाकर भस्म करती है। ताकि जीत और सफलता हमारे जीवन का हिस्सा हो। विश्वास के साथ जीवन का हर काम होता है।

यह सच्चाई सब अच्छी तरह जानते हैं। आप की कामयाबी से बहुत कम लोग खुश होते हैं। बहुत सारे मित्र बहुत सारे परिवारजन भी आपकी खुशी से आपकी कामयाबी से जलन करते हैं। नजर आदि, प्रेत बाधा, और कार्य सिद्धि का ना होना हमारे हृदय  को संताप देने वाला होता है।

इसके लिए महंगे-महंगे उपाय हर आदमी के बस में नहीं है। धुनी का महत्व वैदिक ज्योतिष में और हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। ऐसा माना जाता है कि यदि आपके आसपास बुरी आत्मा या बुरी नजर का या बुरे समय का प्रभाव है। तो धुनी प्रतिक्रिया इससे आपको मुक्ति दिलाती है ।

शुभकामना स्वास्थ्य एवं समृद्धि आदि के लिए भी धुनी का प्रयोग किया जाता है। हवन, यज्ञ,और धुनी का प्रयोग मनुष्य के साथ सदा से चला आ रहा है। हमारा उद्देश्य जनमानस को यह ज्ञात कराना ह कि धुनी क्यों इतना पवित्र है। क्यों धुनी करना हर इंसान का अधिकार बल्कि कर्तव्य भी है ।

यह लेख 120 करोड़  हिंदुस्तानियों के लिए लिखा गया है। हवन तो लाखों रुपए का खर्चा उठाने के बाद ही पूर्ण सिद्ध होता है। जो हर आदमी के बजट में नहीं समाता। आज हम आपको बताएंगे मात्र ₹1 मे ही रोजाना में आप धुनी / हवन को  कैसे अपने घर में कर सकते हैं।

जिससे नजर लगना, प्रेत बाधा और बाहरी दुख तकलीफे खत्म हो जाएगी। धुनी निश्चित तौर पर प्रभावशाली होगी। महंगी हवन करने में पंडित जी को बुलाना और फिर बहुत सारा पैसा खर्च कर के कार्य सिद्धि कामना सरल नही है।

धुनी में डाली जाने वाली हवन की सामग्री आयुर्वेद के अनुसार औषधियों आदि गुणों से युक्त, जड़ी बूटियों से बनी हो। तब हवन की सामग्री अग्नि में पड़कर सर्वत्र व्याप्त हो जाती हैं। घर के हर कोने में फ़ैल कर रोग के कीटाणुओं  का भी विनाश करती है।

धुनी के औषधीय गुण से सर्दी, जूकाम नजला , हर तरह का बुखार, मधुमेह, टी वी रोग मे और हर तरह का सिर दर्द, अस्वाद, श्वास प्रणाली में और नारी संबंधी रोग, यकृत रोग, काफी हद तक इससे ठीक होते हैं ।

यह सूची अंतहीन है 100 से भी ज्यादा रोग इस धुनी की सहायता से काफी हद तक हम कम कर सकते हैं या होने से रोक सकते हैं। इसमें आपको काफी सामान घर से ही मिल जाएगा। कुछ सामान आपको खरीद करना पड़ेगा।

हमे इस धुनी की औषधीय गुणों से भरपूर सामग्री को तैयार करने के लिए हमें चाहिए। एक पैकेट हवन सामग्री, एक पैकेट धूप, सौ ग्राम सफेद चावल, 50 ग्राम गुड, 50 ग्राम कालेतिल, 50 ग्राम सफेद तिल, 50 ग्राम गूगल, दो छुहारे।

कुछ दाने छोटी इलायची, कुछ दाने  बड़ी इलायची, कुछ दाने लाऊंग, सौ ग्राम 7 तरह का अनाज, 50 ग्राम पीली  सेती सरसों, दो चार बदाम, दो चार दाने किशमिश दो चार काजू और 50 ग्राम तीनों मगज ले लेवे।

इन सब चीजों को महीन पीस लो बाद में दो तीन चम्मच घी में सफेद चंदन का बूरा डाल कर इसमें मिक्स कर दो। अब आपकी हवन सामग्री तैयार है। अब हम आपको बताएंगे की धूनी को कैसे करते हैं।

अब हमें हवन करने के लिए हवन कुंड और पंडित जी की जरूरत नहीं है। आप सोचेंगे कि तब हवन कैसे होगा। हम आपको पुरातन तरीके से हवन धुनी करने का तरीका बताएंगे। सूखा हुआ गाय का पवित्र गोबर लेकर उसको गैस पर या किसी तरीके से उसको जला कर लाल कर लो।

फिर उसे प्लेट में रखकर या किसी बर्तन में रखकर इसके ऊपर आधा चम्मच बनाया हुआ मिक्सचर डाल दो। वातावरण पवित्र और सुगंधित हो जाएगा। फिर हाथ जोड कर 11 बार गायत्री मंत्र का जाप करके नव ग्रहों को नमस्कार करना है । और प्रार्थना करें कि सब विघ्न इस की कृपा से दूर हो जाऐ।

धुनी करने से तेज तप बल में वृद्धि होती है।और पाप नष्ट होते हैं। शीतलता प्राप्त होती है। घर में सुख शांति  वास करती है। संतान प्राप्त होती है। घर भी पवित्र हो जाता है। पूर्ण परिवार के प्राणों की रक्षा होती है।

संसारिक सुख, वैभव, प्रतिष्ठा, सम्मान, लक्ष्मी और विद्या प्राप्त होती है । इसको रोजाना करने से शिव धाम की प्राप्ति तुलया  पुण्य मिलता है। सुख प्राप्ति होगी। शत्रु का नाश होगा। शत्रुता समाप्त होगी। पति पत्नी के संबंध सुधरेंगे। सुंदर वस्त्रों की प्राप्ति होगी। दांपत्य जीवन का सुख बढ़ेगा। धर्म की रक्षा होगी। धन बढ़ेगा।

सम्मान स्वाभिमान की रक्षा होगी। और धुनी के अंत में शांति मंत्र का जाप करके पुण्य के भागी बने। हम इस धुनी की पद्धति से ईश्वरीय शक्ति को अपनी सहायता के लिए पाते है। धुनी से पहले गंगा जल छिड़कने से घर में शुभ शक्तियों का आगमन होता है।

इस धुनी को रोजाना करने से इच्छा शक्ति दृढ़ होती है । और मनोकामनाएं पूर्ण होती है। शास्त्रों के अनुसार धुनी करते हुए गणेश जी से श्रेष्ठ बुद्धि की प्रार्थना करें । सरस्वती से श्रेष्ठ विद्या प्रदान करने की प्रार्थना करें ।लक्ष्मी से धन प्राप्ति प्रदान करने की प्रार्थना करें। रिद्धि सिद्धि से धन के सदुपयोग की प्रार्थना करें।

धुनी से पूर्ण सिद्धि प्राप्त करने के लिए और सर्व कार्य सफलता लिए संक्रांति के दिन और पूर्णिमा के दिन यह धुनी  दैवीय कार्य मान कर करे। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की कलाये पूरी होती हैं। जो हमें शीतलता और सफलता प्रदान करती है।

संक्रांति के दिन सूर्य का नई राशि में प्रवेश होता है । हम आशा करते हैं कि सूर्य इस माह में सब ग्रहों की शुभ किरणों को लेकर हमारे ऊपर नेक असर करेगा।  सक्रांति और पूर्णिमा के दिनों में धरती के जागृत होने के कारण धुनी करने का पुण्य का फल हजारों गुना ज्यादा मिलता है ।

 

1 महीने की हवन सामग्री फ्री पाने के लिए इस चैनल को पहले सब्सक्राइब करें और दि गयी वेबसाइट पर जाकर अपना लॉगिन करें। हर महीने पहले 10 सब्सक्राइबरो  को DHARAMASTRO RESEARCH INSTITUTE Of ASTROLOGY की तरफ से फ्री मे यह हवन सामग्री उपहार के तौर पर सामग्री भेजी जाएगी।

दोस्तों हमारी धर्म एस्ट्रो टीम आपकी सफलता की कामना करते हुये जल्द ही कुछ नये वीडियो ले कर आपके पास हाजिर होगी।धन्यवाद।

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