सोमवार व्रत कथा

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सोमवार व्रत कथा
चंद्रमा की शीतलता हम सब जानते हैं। जन्म कुंडली  मे चंद्रमा का नष्ट होना या खराब होना एक दुर्भाग्य का कारण बनता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा आयु का कारक भी है। चंद्रमा के नष्ट होने से आयु का श्रय होना निश्चित होता है।

ज्योतिष में तंत्र विधि के अनुसार भगवान शंकर की आराधना कर आयु को लंबा करना निरोग होना और चंद्रमा को नेक कर लेना सब कष्टों से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। चंद्रमा की शांति के लिए सोमवार का व्रत और भगवान शंकर की पूजा नेक फल वाली होती है। व्रत की विधि और कथा आपके लिए प्रस्तुत है

बहुत समय पहले अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी  रहता था | उस के पास सभी सुख सुविधाएँ उसके घर में थी | दूर-दूर तक उसका आपना व्यापार फैला हुया था | नगर के सभी लोग उस व्यापारी का काफी सम्मान करते थे |  सब कुछ संपन्न होने के बाद भी वह व्यापारी हमेशा दुखी रहता था, क्योंकि उसको पुत्र की प्राप्ती नहीं थी | जिस कारण से अपने मृत्यु के पश्चात् आपने उत्तराधिकारी की चिंता उसे हमेशा ही सताती रहती थी |

वह पुत्र प्राप्ति के लिये व्यापारी हर सोमवार भगवान् शिव की व्रत-पूजा पूर्ण विधि से किया करता था। सुबह और शाम के समय भगवान शिव के मंदिर में जाकर बडी श्रद्धा से शिवजी के सामने घी का दीपक किया करता था | उसकी अनन्त भक्ति देखकर मां पार्वती उस व्यापारी पर प्रसन्न हो गई और भगवान शिव से उस व्यापारी की पुत्र प्राप्ति की मनोकामना को पूर्ण करने का निवेदन किया |

भगवान शिव पार्वती जी से बोले- हे पार्वती इस संसार में सब जीवो को उनके कर्मो के अनुसार फल प्राप्त होता है | संसार मे प्राणी जैसा कर्म करते हैं, उन्हें वैसा ही प्रति फल प्राप्त होता है।भगवान शिव द्वारा समझाने के बावजूद देवी पार्वती ना मानी और उस व्यापारी की पुत्र प्राप्ती की मनोकामना पूर्ति करने हेतु वे शिवजी से बार-बार प्रार्थना करती रही |

अंततः मा पार्वती  के आग्रह को देखकर भगवान शिव को उस व्यापारी को पुत्र प्राप्ति का वरदान देना ही पड़ा | वरदान देने के पश्चात् भगवान शिव पार्वती देवी से बोले।हे देवी आपके आग्रह पर मैंने उस व्यापारी को पुत्र प्राप्ति का वरदान तो दे दिया है  परन्तु उसका यह पुत्र 14 वर्ष से अधिक आयू तक जीवित नहीं रह पायेगा |

तब भगवान शिव उस व्यापारी के स्वप्न में आए और उसे उस की भक्ति के कारण उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया और उसके पुत्र के 14 वर्ष तक ही जीवित रहने की भी बात बताई | भगवान शिव के वरदान से व्यापारी को ख़ुशी तो हुई, लेकिन पुत्र की अल्पायु की चिंता ने उस ख़ुशी को क्षण मे ही नष्ट कर दिया | परन्तु व्यापारी पहले की तरह श्रद्धा से सोमवार के दिन भगवान शिव की विधिवत व्रत करता रहा |

जल्द ही उसके घर अति सुन्दर बालक ने जन्म लिया, सारे घर में खुशियां भर गई | शहर भर मे धूमधाम से पुत्र जन्म का समारोह मनाया गया परन्तु उस व्यापारी को पुत्र-जन्म की अधिक ख़ुशी ना हुई क्योंकि उसे पुत्र की अल्प आयु का रहस्य प्राप्त था |  पुत्र के 12 वर्ष होने पर उस व्यापारी ने उसे उसके मामा के साथ उच्च विधा प्राप्ती के लिए वाराणसी शहर मे भेज दिया |

लड़का अपने मामा के साथ शिक्षा प्राप्ति के लिये शहर को चल दिया | रास्ते में जहां भी मामा-भांजा विश्राम हेतु रुकते, वहीं पूर्ण श्रद्धा से यज्ञ करते और ब्राह्मणों को भोजन भी कराते थे | एक लम्बी यात्रा के बाद मामा और भांजा एक बडे नगर से गुजरे | उस दिन नगर के एक बहुत आमीर व्यापारी की कन्या का विवाह उत्सव था, जिस कारण से पूरे नगर को सजाया गया था |

तय समय पर वर सहित बारात उस नगर मे पहुंच गई। लेकिन वर का पिता अपने वर बेटे के एक आंख से काने होने के कारण चिंतित था | उसे भय था कि इस बात का पता चलने पर कहीं कन्या का पिता इस विवाह से इनकार न कर दे | इससे उस के परिवार की बदनामी होगी | वर के पिता ने व्यापारी के सुन्दर पुत्र को देखा तो उसके मस्तिष्क में तक्षण एक विचार आया की क्यों न इस लड़के को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं।  और विवाह के बाद इसको कुछ धन दे कर विदा कर दूंगा। फिर वधु को अपने नगर ले जाऊंगा |

वर के पिता ने लड़के के मामा से इस सम्बन्ध में बात की | मामा ने धन मिलने के लालच में वर के पिता की बात स्वीकार कर ली और लड़के को दूल्हे का वस्त्र पहनाकर वधु से विवाह कर दिया  | वधु के पिता ने बहुत सारा धन देकर आपनी बेटी को विदा किया | शादी के बाद लड़का जब वधु के साथ लौट रहा था तो वह सच नहीं छिपा सका और उसने वधु की ओढ़नी पर लिख दिया तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ था, मैं तो वाराणसी पढ़ने के लिए जा रहा हूं और अब तुम्हें जिस नवयुवक की पत्नी बनना पड़ेगा, वह काना है |

जब वधु ने अपनी ओढ़नी पर लिखा हुआ पढ़ा तो उसने काने लड़के के साथ जाने से स्पष्ट इनकार कर दिया | वधु के पिता ने सभी बातें जानकर  वधु को आपने घर में ही रख लिया और काने लडके के साथ वधु को विदा नहीं किया | उधर लड़का अपने मामा के साथ वाराणसी पहुंच गया और गुरुकुल में पढ़ना शुरू कर दिया | जब उसकी आयु 14 वर्ष की हुई तो उसने एक महान यज्ञ किया |

यज्ञ के समाप्ति पर ब्राह्मणों को भोजन कराया और खूब अन्न दान, वस्त्र दान किए | रात को वह अपने शयनकक्ष में आ कर सो गया | उसी रात शयनावस्था में ही उसके प्राण-पखेड़ू उड़ गए | सूर्योदय पर मामा आपने मृत भांजे को देखकर रोने-पीटने लगा तो आसपास के लोग भी एकत्र होकर उस से दुःख प्रकट करने लगे |लड़के के मामा के रोने, विलाप करने के स्वर समीप से गुजरते हुए भगवान शिव और माता पार्वती ने भी सुने |

माता पार्वती ने भगवान से कहा- प्राणनाथ, मुझे इन के विरलाप सहन नहीं हो रहे है। कृपया आप इन के कष्टों  को अवश्य दूर करे | भगवान शिव ने पार्वती के साथ आपने अदृश्य रूप में उन के समीप जाकर देखा की यह तो उसी व्यापारी का पुत्र है, जिसे मैंने 14 वर्ष की आयु का वरदान दिया था।अब इसकी आयु पूरी हो गई है | माता पार्वती ने फिर भगवान शिव से उस बालक को फिर से जीवन दान देने का आग्रह किया |

माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित कर दिया और कुछ ही पल उपरांत वह लडका जीवित होकर उठ गया। यह देखकर लडके के मामा को अति हर्ष हुआ |शिक्षा समाप्त करके लड़का आपने मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया | दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका कुछ समय पहले विवाह हुआ था तब उन दोनो ने उस नगर में भी यज्ञ का आयोजन किया |

समीप से गुजरते हुए नगर के उस व्यापारी ने यज्ञ का आयोजन देखा और उसने तुरंत ही लड़के और उसके मामा को पहचान लिया | यज्ञ के समाप्त होने पर उस ने मामा और लड़के को आपने घर में ले गया और कुछ दिन उन्हें वहा रखकर बहुत-सा-धन, वस्त्र आदि देकर लडके को वधु के साथ विदा कर दिया |इधर व्यापारी और उसकी पत्नी बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे |

उन्होंने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि यदि उन्हें अपने बेटे की आकाल मृत्यु का समाचार मिला तो दोनों भी अपने प्राण तुरंत त्याग देंगे। परन्तु आपने बेटे के जीवित वापस लौटने का समाचार सुना तो वह बहुत प्रसन्न हुए | वह अपने पत्नी और मित्रो के साथ नगर के द्वार पर पहुंचे | अपने बेटे के विवाह का समाचार सुनकर और पुत्रवधू  को देखकर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा |

उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के स्वप्न में आकर कहा- हे वत्स मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान की है | पुत्र की लम्बी आयु जानकार व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ |सोमवार का व्रत करने से व्यापारी के घर में खुशियां लौट आईं | शास्त्रों में लिखा है कि जो स्त्री-पुरुष सोमवार का विधिवत व्रत करते और व्रतकथा सुनते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं |

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