मूलांक 4

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मूलाकं  4 जिन व्यक्तियों का जन्म महीने की , 4 , 13 , 22, 31 , तारीख को हो उनका जन्मांक 4  होता है। सूक्ष्म गणना करने के लिए मूलांक निकालना चाहिए ,जिसके लिए दिन, मास , वर्ष की गणना करनी चाहिए।  जिन व्यक्तियों का जन्मांक 4 होता है वह जातक राहु ग्रह से प्रभावित रहता है।

मूलाकं 4 के जातक जन्म से ही चंचल,  विरोधी प्रवृर्ति के एवं धर्म के प्रति इनकी आस्था कम ही होती है। यह जातक गेहुआ रंग के होते है।उन के भोहो और सर पर अधिक बाल और मध्यम  नैन नक्श परन्तु अत्यधिक आकर्षण वाले होते है। यह जातक दूसरों के प्रति बहुत उदार होते है। मूलाकं 4 के जातक कम्पनी एजेंट , ट्रांसपोर्टर , कंप्यूटर हार्डवेयर का काम, वाहनों के कलपुर्जे , बिजली का सामान , भवनों के नक़्शे, ठेकेदारी, बियर बार,आदि के कामो मे हो सकते हैं |

मूलाकं 4  वाली स्त्रियाँ व्यवहारिक  एवं अच्छे चरित्र की होती है और अपने पति से ज्यादा गुणी तथा पढ़ी लिखी होती है।मूलाकं 4 की  स्त्रियाँ अपने उसूलों की पक्की तथा आत्म सम्मान वाली होती है। मूलाकं 4 की स्त्रियाँ अपने पति के सभी कार्यों में सम्पूर्ण सहयोग देती हैं। मूलाकं 4  के जातकों को कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, एवं मानसिक पीड़ा की संभावना बनी रहती है। इन के शरीर के ऊपरी हिस्से पर चोट का निशान रहता है।

मूलांक 4 का स्वामी ग्रह राहु तो कुछ अंकशास्त्री इसे यूरेनस या नकारात्मक सूर्य का अंक भी मानते है। लेकिन आधीकांश इसे राहु का अंक भी मानते हैं। मूलांक 4 वाले महान क्रांतिकारी, वैज्ञानिक या राजनीतिज्ञ हो सकते है। लेकिन कई बार मूलांक 4 वाले को घमंडी, उपद्रवी, अहंकारी और हठी भी देखा गया है। लेकिन ये साहसी व्यवहार कुशल और चकित कर देने वाले कामों को करने में भी निपुण होते हैं। मूलांक 4 वाले घर बाहर समाज और राजनीति हर प्रकार की अच्छी जानकारी रखते हैं। ये मनमौजी होते है यदि इन पर कुसंगति का प्रभाव पड़ जाता है तो धीरे-धीरे दूर होता है।मूलांक 4 वाले समय के पाबंद होते हैं। इन्हें कई बार जीवन मे संघर्ष करते हुए भी देखा जाता है।

मूलाक4 वाले अच्छी विद्या प्राप्त करते है। लेकिन स्वभाव में गंभीरता की कमी के कारण विद्या में व्यवधान आने की सम्भावना भी रहती है। फ़िर भी ये शोध, विजली के काम एवं विचित्र विषयों में रुचि रखते हैं। मूलाकं 4 वाले जातकों को  गुप्त विद्या में भी रुचि होती है। मूलाकं 4 वालो को आपनी आर्थिक स्थिति के कारण कई समस्याओं और उलझनों का सामना करना पड़ता है। जीवन संघर्ष के बाद इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। व्यवहारिक रूप से काम करने में इन्हें लाभ मिलता है। मूलाक 4 वालो की आर्थिक स्थिति में कभी-कभी बड़ा उछाल आते हुए भी देखा गया है। ये अपने पैसे को व्यर्थ के कामों में व्यय करते हुए भी देखे गए हैं।

ज्यादा बोलने के कारण यह अपने सम्बंध को बनाये रखते है। इनकी अपने भाई बहनों से अधिक पटती है।  कोई संबंधी या मित्र भी मूलांक ४ वाला हो तो उससे इनकी अच्छी बनती है। ये दूसरों के साथ जल्दी ही मित्रता कर लेते हैं। ये मित्रों को खूब लाभ देते हैं लेकिन इन्हें मित्रों से अधिक लाभ नहीं मिल पाता। मूलांक 1,2,3 वालों से इनका स्वाभाविक संबंध बन जाता है। मूलांक 8 वाले मित्रों से ये विशेष आकर्षित होते हैं। लेकिन इन्ही के साथ इनका टकराव भी होता है तथा हानि भी उठानी पड़ती है।

मूलाकं 4 वालो के विवाह या प्रेम संबंध अधिकतर सफल रहते है। ये बडो से लेकर छोटो और अमीर से लेकर गरीब लोगों से घुल मिल जाते हैं। विपरित की और इनका विशेष झुकाव होता है। ये जातक अपने प्रियजन के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं। मूलांक 4 वाले अपने कार्य के लिए क्षेत्र मे और अपने कार्य अधिकार में दूसरों की दखलअंदाजी बरदाश्त नही कर सकते है। मूलांक 4 वाले अच्छे व्यापारी ट्रांसपोर्टर, इण्जीनिअर ठेकेदार्म वैज्ञानिक, उद्योगपति, राजनेता, पायलट, डिजाइनर, डाक्टर, वकील, प्रोफ़ेसर, शिक्षाविद व लीडर हो सकते हैं। किसी विभाग के प्रमुख होकर ये बड़े-बडे परिवर्तन कर सकते हैं। हालांकि नौकरी में इन्हें कई बार हानि भी उठानी पड़ती है।

मूलांक 4 वाले जातक जीवन शक्ति की कमी के कारण ही बीमार होते है। इन्हें विचित्र और अचानक रोग होते है। बीमारी के कारणों का पता नहीं चलता फ़िर भी मानसिक विकार, तंतु और श्वास प्रणाली के रोग, रक्त चाप हृदय रोग नेत्र रोग, पीठ दर्द इन्द्री रोग, मिर्गी व अनिद्रा रोग जैसे रोगों के होने की सम्भावना रहती है।मूलांक चार वाले जातकों के लिए राहु की खराब दशा में समय कठिन प्रतीत होता है। राहु के खराब होने के समय जातक की निद्रा में कमी आती है। भोजन और खानपान का स्वाद कम हो जाता है और खाने में नमक की मात्रा ज्यादा लेने लगता है। सर से बाल कम होने शुरू हो जाते हैं। राहु की खराब ग्रह दशा में जातक कई बार रास्ता भी भूलने लगता है।

मूलाकं 4वालो जातको को सभी प्रकार की परेशानियों से बचने के लिये   एक ग्राम का मोती चांदी की अँगूठी में फिट करवा कर सोमवार सुबह के समय पूजा  करके अँगूठी को दूध में व् गंगाजल में स्नान करवा कर चन्दर के मंत्र जाप: ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः। का उच्चारण 108 बार करके अँगूठी को सिद्ध करके अनामिका उँगली में पहनना चाहिए।और सफलता के लिए चंद्रमा के मंत्र का जाप नित्य करना चाहिए।

जन्माक 4 के लिए अनुकूल :

समयावधि २२ जून से २३ जुलाई तक का समय

अधिष्ठाता ग्रह राहू

शुभ वार  रविवार , सोमवार एवं बुधवार

तारीख  4 , 13 , 22  और 31

मित्रता मूलांक   1,2,4,8 वाले व्यक्ति

रंग   नीला

दिशा  दक्षिण व् पूर्व

रत्न    गोमेद

धातु   स्वर्ण

जन्माक 4 के लिए प्रतिकूल  

समयावधि 23 नवम्बर से 20  दिसंबर तक का समय

अधिष्ठाता ग्रह

शुभ वार  शनिवार एवं शुक्रवार और रोजाना पक्की शाम का समय

तारीख  7 , 16 और 25

मित्रता  मूलांक 3 और 7 वाले व्यक्ति

रंग   सफेद

दिशा  उत्तर एवं पश्चिम

रत्न   गोमद

धातु  लोहा और जिस्त

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