करोना संमकण

Horoscope, Janam Kundali, Business Problems, Health problems

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शनि का दान मजदूरों को अन्न कनक का दान ग्रहों से प्राप्त होने वाले कष्टों को कम करने में और आप को स्वस्थ रखने में सहायक रहेगा। 4 अप्रैल 2020 से 14 अप्रैल 2020 तक सूर्या का 21 डिग्री से 30 डिग्री तक रेवती नक्षत्र में रहना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत सुखद स्थिति को उत्पन्न करेगा। इस समय में जुबान को छुपाना और जुबान पर मीठे का होना यानी किसी भी मीठी वस्तु गुड आदि का खाना स्वास्थ्य लाभ देगा।

ज्योतिष में ग्रहण के अनुसार स्वास्थ्य का बहुत महत्व है। सारी दुनिया भर मे इस समय  करोणा नामक संमकण अपना प्रभाव डाल रहा है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार इसकी शुरुआत 16 दिसंबर दिन सोमवार जब सूर्य वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश होने के समय से ही हो गयी थी। धनु राशि में सूर्य का प्रवेश ज्योतिष की दृष्टि मे शुभ नहीं था। ब्रह्मांड में धनु राशि में पहले से ही शनि, बृहस्पति और केतु विराजमान थे। सूर्य का प्रवेश धनु राशि में होने से इस माह में दो ग्रहणो का होना निश्चित हो गया था।

सूर्य ग्रहण अमावस्या पर और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा पर होगा।  सूर्य और चंद्रमा 24 जनवरी दिन शुक्रवार धनु राशि जिस का स्वामी बृहस्पति है केतु और शनि के साथ इकट्ठा होने की स्थिति होने के कारण चंद्र ग्रहण की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इन ग्रहों का इस राशि पर इकट्ठा होना किसी भी महामारी को बढ़ाने और पैदा करने में सहायक होता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार इस विषैले तत्व के जागृति की संरचना 16 दिसंबर से 24 दिसंबर के बीच ही हो गयी थी।

यह हम सभी जानते हैं कि सूर्य और चंद्रमा दो ग्रहों के प्रभाव से हमारी पृथ्वी स्पष्ट रूप से प्रभावित होती है। और हमारे मूलभूत पंचतत्व पृथ्वी,अकाश, जल,अग्नि और वायु जिस से मानव और पृथ्वी पर मौजूद सब वस्तुओं की संरचना  होती है। इन पंच तत्वों की ऊर्जा का मुख्यत स्रोत सूर्य और चंद्रमा ही है। खगोलीय स्थिति में जब भी सूर्य और चंद्रमा राहु और केतु की पकड़ में आते हैं तो ग्रहण लगते हैं।

ग्रहण के समय में सभी ग्रहो के गैसिया प्रभाव से सूर्य पर विस्फोट होने के कारण सूर्य की किरणे दूषित हो जाती है। वह किरणे हमारी पृथ्वी तक दूषित और विषैले तत्व लेकर पहुंच जाती है। क्रोना नामक संमकण इन्हीं सूर्य की दूषित किरणों की उपज है। ब्रह्मांड में बृहस्पति की स्तिथि धनु राशि में मूला नक्षत्र और केतु की स्तिथि धनु राशि के पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रभाव मे होने के कारण एक विषैला संमकण हमारे स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है।

बृहस्पति का हमारे शरीर में स्वास् तंत्र पर बहुत प्रभाव है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति दुनिया भर में  धार्मिक स्थानों, स्कूलों, न्यायालय, और खेल के मैदानों का भी प्रतिनिधित्व भी करता है। बृहस्पति के दूषित होने से ही बृहस्पति के प्रभाव के अधीन आने वाली वस्तुओं पर बुरा प्रभाव सारी दुनिया में देखने को आया है।

धनु राशि में स्थित बृहस्पति के शनि और केतु से कुपित हो जाने से हमारा स्वास्थ्य हमारे स्कूल हमारे धार्मिक स्थल और हमारे न्यायालय अत्याधिक प्रभावित हुए हैं। परंतु सबसे अधिक प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर ही पड़ा है। यह प्रभाव चंद्रमा जो भारतीय ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी पर जल और मन का प्रतिनिधित्व करता है। उस जल के कुपित हो जाने से ही हुआ है। पृथ्वी पर 75 परसेंट पानी स्थापित है और यही अनुपात लगभग हर एक मनुष्य के शरीर में पानी का अनुपात है।

चंद्रमा के ग्रहण मे चंद्रमा के कुपित होने से चंद्रमा से संबंधित जल अत्यधिक प्रभावित हुआ है। जल ही समस्त पृथ्वी पर जीवो का आधार है। जल से ही जलचर,पशु-पक्षी और वनस्पति प्रभावित होती है। इसी प्रभाव के कारण प्राणी के मन में स्वास्थ्य को लेकर भय की स्थिति  उत्पन्न हुई है। खगोलीय स्थिति में सूर्या का 14 मार्च शनिवार 2020 को मीन राशि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मे जिसका स्वामी बृहस्पति है हो रहा है।

इस तिथि के बाद सारी दुनिया की सरकारें इस महामारी के प्रति सूर्य के प्रभाव के कारण जागरूक हो गई है। सूर्या की खगोलीय स्तिथि मीन राशि में 14 अप्रैल बृहस्पतिवार 2020 तक रहेगी। 24 मार्च से 4 अप्रैल 2020 तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र जिसका स्वामी शनि है। इस नक्षत्र सूर्य 11 डिग्री से लेकर 20 डिग्री तक रहेगा। किसी भी ग्रह का योवन काल 11 डिग्री से 20 डिग्री तक ही होता है। तो इस विषैले संमकण का अत्यधिक प्रभाव 24 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक अत्यधिक रहेगा।

भारत से उत्तरी पश्चिमी देश अत्यधिक प्रभावी रहेंगे। 4 अप्रैल 2020 दिन शनिवार से सूर्य का प्रवेश रेवती नक्षत्र मे होगा। जिसका स्वामी बुध है। तब यह वायरस आश्चर्यजनक रूप से कम होना शुरू हो जाएगा और 14 अप्रैल 2020 तक पहुंचते इसका प्रभाव उत्तरी पश्चिमी देशों और भारत से लगभग समाप्त हो जाएगा। पश्चिमी देशों में इसका प्रभाव कुछ सप्ताह तक और चल सकता है।

लेकिन यह प्रभाव अति शीघ्र ही आश्चर्यजनक रूप से अपने आप समाप्त हो जाएगा। 24 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक ग्रहों के उग्र प्रभाव को कम करने के लिए दोनों पांव के अंगूठो को सफेद धागे से बांधना और  अपने सिर को सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े से ढक कर रखना आपके स्वास्थ्य तंत्र को आश्चर्यजनक रूप से प्रभावित कर आप को स्वास्थ प्रदान करेगा।

शनि का दान मजदूरों को अन्न कनक का दान ग्रहों से प्राप्त होने वाले कष्टों को कम करने में और आप को स्वस्थ रखने में सहायक रहेगा। 4 अप्रैल 2020 से 14 अप्रैल 2020 तक सूर्या का 21 डिग्री से 30 डिग्री तक रेवती नक्षत्र में रहना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत सुखद स्थिति को उत्पन्न करेगा। इस समय में जुबान को छुपाना और जुबान पर मीठे का होना यानी किसी भी मीठी वस्तु गुड आदि का खाना स्वास्थ्य लाभ देगा।

नमस्कार दोस्तों धर्म एस्ट्रो इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोलॉजी टीम इस चैनल में आपका स्वागत करती है। ज्योतिष में ग्रहण के अनुसार स्वास्थ्य का बहुत महत्व है। सारी दुनिया भर मे इस समय  करोणा नामक संमकण अपना प्रभाव डाल रहा है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार इसकी शुरुआत 16 दिसंबर दिन सोमवार जब सूर्य वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश होने के समय से ही हो गयी थी। धनु राशि में सूर्य का प्रवेश ज्योतिष की दृष्टि मे शुभ नहीं था। ब्रह्मांड में धनु राशि में पहले से ही शनि, बृहस्पति और केतु विराजमान थे। सूर्य का प्रवेश धनु राशि में होने से इस माह में दो ग्रहणो का होना निश्चित हो गया था।

सूर्य ग्रहण अमावस्या पर और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा पर होगा।  सूर्य और चंद्रमा 24 जनवरी दिन शुक्रवार धनु राशि जिस का स्वामी बृहस्पति है केतु और शनि के साथ इकट्ठा होने की स्थिति होने के कारण चंद्र ग्रहण की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इन ग्रहों का इस राशि पर इकट्ठा होना किसी भी महामारी को बढ़ाने और पैदा करने में सहायक होता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार इस विषैले तत्व के जागृति की संरचना 16 दिसंबर से 24 दिसंबर के बीच ही हो गयी थी।

यह हम सभी जानते हैं कि सूर्य और चंद्रमा दो ग्रहों के प्रभाव से हमारी पृथ्वी स्पष्ट रूप से प्रभावित होती है। और हमारे मूलभूत पंचतत्व पृथ्वी,अकाश, जल,अग्नि और वायु जिस से मानव और पृथ्वी पर मौजूद सब वस्तुओं की संरचना  होती है। इन पंच तत्वों की ऊर्जा का मुख्यत स्रोत सूर्य और चंद्रमा ही है। खगोलीय स्थिति में जब भी सूर्य और चंद्रमा राहु और केतु की पकड़ में आते हैं तो ग्रहण लगते हैं।

ग्रहण के समय में सभी ग्रहो के गैसिया प्रभाव से सूर्य पर विस्फोट होने के कारण सूर्य की किरणे दूषित हो जाती है। वह किरणे हमारी पृथ्वी तक दूषित और विषैले तत्व लेकर पहुंच जाती है। क्रोना नामक संमकण इन्हीं सूर्य की दूषित किरणों की उपज है। ब्रह्मांड में बृहस्पति की स्तिथि धनु राशि में मूला नक्षत्र और केतु की स्तिथि धनु राशि के पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रभाव मे होने के कारण एक विषैला संमकण हमारे स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है।

बृहस्पति का हमारे शरीर में स्वास् तंत्र पर बहुत प्रभाव है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति दुनिया भर में  धार्मिक स्थानों, स्कूलों, न्यायालय, और खेल के मैदानों का भी प्रतिनिधित्व भी करता है। बृहस्पति के दूषित होने से ही बृहस्पति के प्रभाव के अधीन आने वाली वस्तुओं पर बुरा प्रभाव सारी दुनिया में देखने को आया है।

धनु राशि में स्थित बृहस्पति के शनि और केतु से कुपित हो जाने से हमारा स्वास्थ्य हमारे स्कूल हमारे धार्मिक स्थल और हमारे न्यायालय अत्याधिक प्रभावित हुए हैं। परंतु सबसे अधिक प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर ही पड़ा है। यह प्रभाव चंद्रमा जो भारतीय ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी पर जल और मन का प्रतिनिधित्व करता है। उस जल के कुपित हो जाने से ही हुआ है। पृथ्वी पर 75 परसेंट पानी स्थापित है और यही अनुपात लगभग हर एक मनुष्य के शरीर में पानी का अनुपात है।

चंद्रमा के ग्रहण मे चंद्रमा के कुपित होने से चंद्रमा से संबंधित जल अत्यधिक प्रभावित हुआ है। जल ही समस्त पृथ्वी पर जीवो का आधार है। जल से ही जलचर,पशु-पक्षी और वनस्पति प्रभावित होती है। इसी प्रभाव के कारण प्राणी के मन में स्वास्थ्य को लेकर भय की स्थिति  उत्पन्न हुई है। खगोलीय स्थिति में सूर्या का 14 मार्च शनिवार 2020 को मीन राशि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मे जिसका स्वामी बृहस्पति है हो रहा है।

इस तिथि के बाद सारी दुनिया की सरकारें इस महामारी के प्रति सूर्य के प्रभाव के कारण जागरूक हो गई है। सूर्या की खगोलीय स्तिथि मीन राशि में 14 अप्रैल बृहस्पतिवार 2020 तक रहेगी। 24 मार्च से 4 अप्रैल 2020 तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र जिसका स्वामी शनि है। इस नक्षत्र सूर्य 11 डिग्री से लेकर 20 डिग्री तक रहेगा। किसी भी ग्रह का योवन काल 11 डिग्री से 20 डिग्री तक ही होता है। तो इस विषैले संमकण का अत्यधिक प्रभाव 24 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक अत्यधिक रहेगा।

भारत से उत्तरी पश्चिमी देश अत्यधिक प्रभावी रहेंगे। 4 अप्रैल 2020 दिन शनिवार से सूर्य का प्रवेश रेवती नक्षत्र मे होगा। जिसका स्वामी बुध है। तब यह वायरस आश्चर्यजनक रूप से कम होना शुरू हो जाएगा और 14 अप्रैल 2020 तक पहुंचते इसका प्रभाव उत्तरी पश्चिमी देशों और भारत से लगभग समाप्त हो जाएगा। पश्चिमी देशों में इसका प्रभाव कुछ सप्ताह तक और चल सकता है।

लेकिन यह प्रभाव अति शीघ्र ही आश्चर्यजनक रूप से अपने आप समाप्त हो जाएगा। 24 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक ग्रहों के उग्र प्रभाव को कम करने के लिए दोनों पांव के अंगूठो को सफेद धागे से बांधना और  अपने सिर को सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े से ढक कर रखना आपके स्वास्थ्य तंत्र को आश्चर्यजनक रूप से प्रभावित कर आप को स्वास्थ प्रदान करेगा।

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