आप का भाग्य रतन

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पुखराज रतन

पुखराज पीले रंग का एक खूबसूरत रत्न है। इसे बृहस्पति ग्रह का मुख्या रत्न माना जाता है। पुखराज रतन की गुणवत्ता और मूल्य उस के आकार, रंग तथा शुद्धता के आधार पर तय होती है। पुखराज रतन सफ़ेद और पीले रंग में मौजूद होते हैं, लेकिन जातक को अपनी राशि के अनुसार रंग का चयन कर पुखराज को धारण करना चाहिए। 

पुखराज के तथ्य:

पुखराज के बारे में बताया जाता है कि अगर जातक की कुंडली में बृहस्पति कमज़ोर हो तो उन्हें पीला पुखराज ही धारण करना चाहिए। 

पुखराज के लिए राशि:-
धनु तथा मीन राशियों के जातकों के लिए पुखराज धारण करना अत्यंत लाभकारी हो सकता है।

पुखराज के फायदे:-
अनुभवों के अनुसार पुखराज धारण करने से मान सम्मान तथा धन संपत्ति में वृद्धि होती है। पुखराज धारण करने से शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता मिलती है। इस रत्न से जातकों के मन में धार्मिकता तथा सामाजिक कार्य में रुचि बड़ने लगती है। पुखराज धारण करने से विवाह में आती रुकावटें तथा व्यापार में होता नुकसान से बचाव होता है और धनवान बनने के लिए भी पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है। 

पुखराज से स्वास्थ्य संबंधी लाभ:-
सफल ज्योतिषी मानते हैं कि जिन जातकों को फेफड़े में तकलीफ के समय, दिल के रोग में, परेशानी है तो उन्हें पीला पुखराज धारण करना चाहिए।
 अल्सर, गठिया, दस्त, नपुंसकता, टीबी, हृदय, घुटना तथा जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए भी पीला पुखराज का उपयोग होता है। 

कैसे धारण करें पुखराज:-

पीला पुखराज गुरुवार के दिन धारण करना चाहिए। धारण करने से पूर्व पीली वस्तुओं केला, हल्दी, पीले कपड़े आदि विशेषकर जो बृहस्पति से संबंधित हो उनका दान देना चाहिए । आप पुखराज सवा 5 रत्ती, सवा 7 सवा 9 रत्ती, सवा 12 रत्ती की मात्रा में धारण कर सकते है। पुखराज धारण करने से पहले इसकी विधिवत पूजा-अर्चना की जानी चाहिए। ज्योतिषी की सलाह और जन्मकुंडली देख कर ही पुखराज  धारण करना चाहिए। 

पुखराज का उपरत्न:-
पुखराज के स्थान पर ज्योतिषी, सुनैला या पीला हकीक पहनने की भी सलाह देते हैं।

नीलम रतन

ज्योतिषी मानते है की शनि ग्रह के बुरे प्रभाव और पीड़ा कम करने के लिए आप को नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है। नीलम को हीरे के बाद दूसरा सबसे महगा रत्न माना जाता है। इसे नीलमणि, याकूत, नीलम, अरबी मे कबूद भी कहा जाता है। ज्योतिषी मानते है की यह रत्न पहने से रंक राजा और राजा रंक बना सकता है। 

नीलम के तथ्य:-

 नीलम के बारे में मान्यता है कि जब इस रत्न को दूध में डाला जाए तो दूध भी नीला रंग धारण कर लेता है। कहा जाता है कि नीलम शुभ साबित हो तो मनुष्य के जीवन में खुशियों की बहार ला देता है। लेकिन अशुभ स्थिति में यह नीलम मनुष्य के लिए बहुत अहितकारी साबित हो सकता है।

नीलम के लिए राशि:-

मकर तथा कुंभ राशि के जातकों के लिए नीलम धारण अति लाभकारी साबित हो सकता है। जिन लोगों को शनि साड़ेसाती के प्रभावों मे परेशानी हो रही हो उन्हें भी नीलम रतन धारण करने की सलाह दी जाती है। 

नीलम के फायदे:-

नीला धारण करने से मन अशांत नहीं रहता है।  अनुभवों के अनुसार नीलम धारण करने से ज्ञान तथा धैर्य की वृद्धि होती है। नीलम वाणी में मिठास, अनुशासन तथा विनम्रता पैदा करने मे सय्हक होता है। राजनेताओं और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए नीलम आति लाभकारी माना जाता है। नीलम धारण करने से नेतृत्व क्षमता बढ़ती है पुखराज तनाव तथा चिंताओं से घिरे हों उन्हें नीलम धारण से फायदा हो सकता है। 


स्वास्थ्य में नीलम का लाभ:-  

 ज्योतिष मे मानते हैं कि लकवा, हड्डियों, दांतों और दमा की परेशानी से ग्रस्त रोगियों के लिए नीलाम आति फायदेमंद हो सकता है।  अनुभवों के अनुसार  नीलम पहनने से चर्म रोग तथा प्लेग जैसे बिमारियों से भी निजात मिलती है। ज्योतिषी आप को शनि से प्रभावित रोगों और परेशानियों में भी नीलम धारण करने की सलाह देते हैं। 


कैसे धरण करें नीलम:-  
नीलम रतन को शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। आप को विधिवत रूप से पूजा पाठ करने के बाद ही नीलम धारण करना चाहिए। अगर नीलम पहनने पर पहले कुछ दिनों में इसका विपरीत प्रभाव लगे तो आप को नीलम रत्न को उतार देना चाहिए। आप को नीलम के साथ कोई अन्य रत्न विशेषकर माणिक्य, मोती आदि ना पहनने की सलाह दी जाती है।


नीलम के उपरत्न:-
नीलम रतन कीमती और कम पाया जाने वाला रत्न है। इसके उपलब्ध ना होने की दशा में एमेथिस्ट, या नीला सुनला धारण किया जा सकता है।

माणिक्य रतन

माणिक्य को सब से मूल्यवान रत्न माना जाता है। इसे गुदड़ी का लाल भी कहा जाता है। माणिक्य रतन का रंग लाल होता है। इसे धारण करने पर सूर्य ग्रह की पीड़ा ओर सूर्य ग्रह का दोष शांत होता है। माणिक्य को अंग्रेज़ी में रूबी भी कहते हैं। 

माणिक्य के सत्य तथ्य:-

 माणिक्य रत्न के बारे में कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के साथ कुछ अनहोनी घटित होने वाली हो तो यह मानिक रत्न स्वयं अपना रंग परिवर्तित कर घटना पूर्व आप को सूचित करता है. विद्वान् लोग मानते हैं कि माणिक्य शारीर में विष के प्रभाव को भी कम कर देता है।

माणिक्य के लिए राशि:-
सिंह राशि के जातकों के लिए माणिक्य रत्न धारण करना अत्यंत लाभकारी भी माना जाता है।
माणिक्य पहनने के फायदे:-
अगर जातक, सूर्य की पीड़ा से ग्रस्त हो उन्हें माणिक्य धारण करने की सलाह दी जाती है। इसे धारण करने से मनुष्य बदनामी से बचा जा सकता है।
 इसे धारण करने से विवाहित जीवन में मजबूती आती है।
स्वास्थ्य में मानिक के लाभ:-

अनुभवी ज्योतिषों के अनुसार अच्छा माणिक्य नेत्र रोग तथा हृदय संबंधित रोगों में विशेष लाभकारी माना जाता है और सरदर्द आदि समस्याओं में भी इसका प्रयोग लाभकारी ही होता है। 
 माणिक्य धारण की विधि:-
ज्योतिषा शाशत्र के अनुसार माणिक्य रविवार के दिन सूर्य मंत्रों का जाप करते हुए धारण करना चाहिए। माणिक्य रतन धारण करते समय कुंडली में सूर्य की अच्छी बुरी स्थिति के बारे में भी विचार कर लेना चाहिए। 
माणिक्य का उपरत्न
माणिक्य के स्थान पर कई बार ज्योतिषी गार्नेट भी धारण करने की सलाह देते हैं।

सफेद मोती

सफेद मोती सादगी, पवित्रता और कोमलता की निशानी माने जाने वाला एक चमत्कारी ज्योतिषीय रत्न माना जाता है। मोती को मुक्ता, शीशा रत्न और पर्ल के नाम से भी जाना जाता है। मोती सिर्फ एक रंग का ही नहीं होता बल्कि यह कई अन्य रंगों जैसे गुलाबी, लाल, हल्के पीले रंग का भी पाया जाता है। मोती गहरे समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाए जाते हैं। 

मोती के गहरे तथ्य:-
 मोती रतन के बारे में बताया जाता है कि यह रत्न, बाकी रत्नों से कम समय तक ही चलता है क्योंकि मोती रूखेपन, नमी तथा एसिड से अधिक प्रभावित हो जाता है। प्राचीनकाल में मोती को सुंदरता निखारने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था तथा इसे शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता था।

मोती पहनने के लिए शुभ राशि:-
कर्क राशि के जातकों के लिए मोती रतन धारण करना अत्याधिक लाभकारी माना जाता है । नष्ट चन्द्रमा से जनित बीमारियों और पीड़ा की शांति के लिए मोती धारण करना अति लाभदायक माना जाता है। 

मोती रतन पहनने के फायदे:-
 मोती रतन धारण करने से आप के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। जो जातक मानसिक तनाव से जूझ रहें हों उन्हें मोती को चाँदी में धारण कर लेना चाहिए। जिन जातको को अपनी राशि ना पता हो या कुंडली ना हो तो वो भी मोती धारण कर सकते हैं। 

स्वास्थ्य में मोती रतन का लाभ:-
जो जातक मानसिक शांति, अनिद्रा आदि की पीड़ा से ग्रसत है उन को मोती पहनना बेहद लाभदायक माना जाता है।  नेत्र रोग तथा गर्भाशय जैसे समस्या से बचने के लिए मोती धारण किया जा सकता है। मोती, हृदय संबंधित रोगों के लिए भी अच्छा लाभकारी माना जाता है।

मोती रतन को कैसे धारण करें:-
अनुभवी ज्योत्शियो के मत अनुसार मोती सोमवार के दिन धारण करना अति शुभ होता है। मोती धारण करते समय चन्द्रमा का ध्यान तथा उनके मंत्रों का 108 बार जाप करना चाहिए। चांदी की बनी अंगूठी में मोती धारण करना अत्यधिक श्रेष्ठ माना जाता है। 

मोती रतन के उपरत्न:-
मान्यता है कि मोती नहीं खरीद पाने की स्थिति में जातक मूनस्टोन, सफेद मूंगा या ओपल भी पहन सकते हैं। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी सफल  ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।

मूंगा रतन

लाल रंग का मूंगा रत्न मंगल ग्रह का रत्न माना जाता है। सफल ज्योतिषी मानते हैं कि इसे धारण करने पर मंगल ग्रह की पीड़ा शांत होती है। मूंगा रत्न को भौम रत्न, पोला, मिरजान, लता मणि, कोरल, प्रवाल के नाम से भी जाना जाता है। मूंगा रत्न ज्यादातर गहरे लाल रंग का होता है परंतु यह लाल, सिंदूरी लाल, नारंगी आदि रंग के भी पाए जाते हैं। 

मूंगा के तथ्य:-
मूंगा रतन के बारे में यह माना जाता है कि मूंगा एक वनस्पति है जिसका एक पेड़ है परन्तु  यह रत्न समुद्र में पाया जाता है। मूंगा रतन जितना समुद्र की गहराई में होता है इसका रंग उतना ही हल्का भी होता है।

मूंगा के लिए राशि:-
मेष और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मूंगा रत्न पहना सबसे शुभ माना जाता है। 

मूंगा पहने के फायदे:-
 मूंगा रतन धारण करने से नज़र नहीं लगती है और भूत-प्रेत और किसी बाहरी वस्तु या छाया का डर नहीं रहता है। इस को पहनने से आत्मविश्वास तथा सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है। इस से आप में आकर्षण शक्ति बढ़ती है तथा लोगों का आप को देखने का नजरिया बदलता है। मूंगा को पहनने से करुरता तथा जलन का नाश हो जाता है। 

स्वास्थ्य में मूँगे से प्राप्त लाभ:-
 मूंगा रत्न को धारण करने से रक्त विकार संबंधित समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
 जो जातक हृदय गति के रोगों से ग्रस्त हैं उन्हें मूंगा धारण करना चाहिए। मूगा रतन पहनने से रकत में लाल कण बड जाते है मिर्गी तथा पीलिया रोगियों के लिए यह रत्न उत्तम माना गया है।


कैसे पहने मूंगा रतन:-
मूंगा रत्न को धारण करने से पहले सफल ज्योतिषी से अवश्य सलाह ले लेनी चाहिए। मूंगा रतन मंगलवार के दिन सुबह 8am से 9am तक अमअनामिका में धारण करना चाहिए। पुरुषों को दाएं हाथ में और स्त्रियों को बाएं हाथ की अनामिका उंगली में मूंगा धारण करने का ही विधान है।

मूंगा का उपरत्न:-
मूंगा के स्थान पर लाल हकीक, तामड़ा या संग-सितारा भी धारण किया जा सकता है।

लहसुनिया रतन

लहसुनिया रतन को केतु ग्रह का कारक रत्न माना जाता है। इस को वैदूर्य मणि, सूत्र मणि, केतु रत्न, कैट्स आई, विडालाक्ष के नाम से भी जाना जाता है। लहसुनिया रत्न का रंग हल्का पीला धारीधार होता है। लहसुनिया रत्न दिखने में थोड़ा-सा बिल्ली की आंख जैसा भी प्रतीत होता है। 

लहसुनिया रतन के तथ्य:-

लहसुनिया रतन धारण करने से केतु ग्रह के बुरे प्रभाव का असर कम हो जाता हैं। सफल ज्योतिषी इस रत्न को बेहद अहम मानते हैं। माना जाता है कि गुणयुक्त लहसुनिया पहनना परम सौभाग्य संपन्न होता है और दोष युक्त लहसुनिया रतन पहनना अपने स्वामी को दोषों से संयुक्त कर देता है। इसलिए इसे पहनने से पूर्व इसकी परीक्षा और अनुभवी ज्योतषी से सलाह अवश्य करनी चाहिए।

लहसुनिया रतन पहनने के ज्योतिषीय फायदे:-

ज्योतिष शस्त्र में माना जाता है कि लहसुनिया धारण करने से दुख:-दरिद्रता समाप्त हो जाती है। यह रत्न भूत बाधा तथा काले जादू को दूर रखने में सहायक माना जाता है। सफल ज्योतिषी मानते हैं कि लहसुनिया के धारण करने से रात में बुरे सपने परेशान नहीं करते हैं। 

स्वास्थ्य में लहसुनिया रतन रतन का लाभ :-

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लहसुनिया को धारण करने से शारीरिक दुर्बलता खत्म होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है। मान्यता है कि लहसुनिया रत्न दमे के रोगियों के लिए अत्याधिक लाभकारी होता है। कई सफल ज्योतिषी श्वास नली में सूजन की परेशानी होने पर लहसुनिया धारण करने की सलाह देते हैं। 

कैसे पहने लहसुनिया रतन

सोने या चांदी की अंगूठी में लहसुनिया जड़ाकर सोमवार के दिन धारण करना चाहिए। चूंकि यह एक बेहद प्रभावशाली रत्न होता है इसलिए इसे धारण करने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह परामर्श कर लेना चाहिए।

लहसुनिया का उपरतन:-

लहसुनिया की जगह एलेग्जण्ड्राइट भी धारण किया जा सकता है।

पन्ना रतन

पन्ना रत्न गहरे हरे रंग का होता है। बुध ग्रह की पीड़ा शांत करने के लिए पन्ना धारण करने की सलाह दी जाती है। इसे मरकत मणि, हरितमणि, एमराल्ड पांचू आदि नामों से जाना जाता है। हीरा और नीलम के बाद इसे तीसरा सबसे खूबसूरत रत्न कहा जाता है। पन्ना बेहद कीमती होता है।

पन्ना के तथ्य
पन्ना की असल पहचान करने के लिए लकड़ी पर रत्न को रगड़ने से इसकी चमक ओर अधिक खिलती है। यह मुलायम हरी घास की भांति होता है जिसके ऊपर पानी की बूंद रखने से बूंद उसी समान रहती है। 

पन्ना के लिए राशि
मिथुन तथा कन्या राशि के जातकों के लिए पन्ना रत्न अत्याधिक लाभकारी माना जाता है। 

पन्ना के फायदे
 गुस्से पर काबू करने और मन में एकाग्रता बढ़ाने के लिए पन्ना का प्रयोग करना चाहिए। 
 जो जातक व्यापार तथा अंकशास्त्र संबंधित कार्य कर रहें हों उनके लिए पन्ना लाभकारी साबित होता है।
 बुध ग्रह को स्मरण शक्ति और विद्या आदि का कारक माना जाता है। पन्ना धारण करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। छात्रों के लिए यह विशेष रत्न साबित होता है। 

स्वास्थ्य में पन्ना का लाभ
माना जाता है कि पन्ना पौरुष शक्ति को बढ़ाता है।  यह रत्न दमा के मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए अत्याधिक लाभकारी माना गया है।
 मिर्गी के दौरे से पीड़ित रोगियों के लिए भी पन्ना लाभकारी माना जाता है। 

कैसे करें पन्ना धारण
ज्योतिषी मानते हैं कि पन्ना बुधवार के दिन धारण करना चाहिए। पन्ना धारण करते समय मनुष्य को अपनी कुंडली में बुध की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। रत्न का वजन बेहद अहम होता है। कितने रत्ती का रत्न धारण करें, यह कुंडली का विश्लेषण कर सुनिश्चित करना चाहिए। गरुड पुराण में इसको परखने की विधि बताई गई है।

पन्ना का उपरत्न
पन्ना बेहद कीमती माना जाता है। शुद्ध पन्ना ना मिल पाने की दशा में जेड या फिरोजा धारण किया जा सकता है।

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